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महिलाओं और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ के हैं ये तीन मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण, à¤à¤¸à¥‡ होगा बचाव
कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है। कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ तब होता है जब वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के आहार में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की सही मातà¥à¤°à¤¾ नहीं होती है। कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ असर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ मां और उसके होने वाले बचà¥à¤šà¥‡ पर दिखाई पड़ता है। राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ फेमिली हेलà¥à¤¥ सरà¥à¤µà¥‡ (साल 2015 -16) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जिले के 15 से 49 आयॠवरà¥à¤— की लगà¤à¤— 24 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ वयसà¥à¤• महिलाà¤à¤‚ कम वज़न वाली है जबकि 16 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ वयसà¥à¤• महिलाà¤à¤‚ अधिक वज़न वाली है। 5 वरà¥à¤· से कम उमà¥à¤° के लगà¤à¤— 36 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ छोटे कद वाले या बौने हैं तथा लगà¤à¤— 39.5 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ कम वजन के हैं। महिलाओं और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में होने वाले कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ के तीन मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण हैं।
सामाजिक परंपरा और कà¥à¤°à¥€à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ हैं जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°
बाल विकास à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤¹à¤¾à¤° विà¤à¤¾à¤— के जिला कारà¥à¤¯à¤•म अधिकारी रामेशà¥à¤µà¤° पाल का कहना है कि कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का सीधा संबंध हमारे समाज में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ रà¥à¥à¤¿à¤µà¤¾à¤¦à¥€ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं और रीति-रिवाजों से है। सदियों से चली आ रही यह परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ मां और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखने में बाधा बन रही है। कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का सीधा समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ कà¥à¤› हद तक कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ मां से à¤à¥€ है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि आम तौर पर हमारे समाज में देखा गया है कि परिवार के सà¤à¥€ सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को खिलाने के बाद महिला सà¥à¤µà¤¯à¤‚ खाना खाती है। पहले उसका पति और बचà¥à¤šà¥‡, फिर कहीं जाकर उसकी बारी आती है। आखिरी में उसे जो à¤à¥‹à¤œà¤¨ मिलता है वह उसके लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है या नहीं, यह कà¤à¥€ कोई जानने की कोशिश नहीं करता।
समाज की रà¥à¥à¤¿à¤µà¤¾à¤¦à¥€ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°
अकà¥à¤¸à¤° देखा गया है कि जैसे-जैसे लड़की बड़ी होती है तो कई शारीरिक और सामाजिक बदलाव उसे मां की तरफ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ करते हैं। अब लड़की à¤à¥€ अपनी मां के साथ à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने लगती है यानी कितना पोषण मिला मालूम नहीं। अब मां के साथ बेटी à¤à¥€ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का शिकार होने लगती है और यह चकà¥à¤° इसी तरह चलता रहता है। आमतौर पर हमारे समाज में मां के पोषण का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में ही दिया जाता है। कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ मां की संखà¥à¤¯à¤¾ बà¥à¤¨à¥‡ का कारण केवल गरीबी ही नहीं बलà¥à¤•ि समाज की रà¥à¥à¤¿à¤µà¤¾à¤¦à¥€ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ हैं। इसके अलावा उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि किशोरियों में हर माह मासिक धरà¥à¤® के दौरान रकà¥à¤¤ सà¥à¤°à¤¾à¤µ होना à¤à¥€ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ होने का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण होता है, जबकि लड़कों में इस पà¥à¤°à¤•ार की कोई समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती है।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती हैं माताà¤à¤‚ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤
बेटियों के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की उपेकà¥à¤·à¤¾- à¤à¤• परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ है कि बेटियों के बजाय बेटों के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥ पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया जाता है। à¤à¥‹à¤œà¤¨ वितरण में लड़कों और लड़कियों के बीच असमानता और लड़कियों के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की उपेकà¥à¤·à¤¾ à¤à¥€ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ को बà¥à¤¾à¤µà¤¾ देती है। बेटी अगर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ है तो वही आगे जाकर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ मां बनेगीं।
कम उमà¥à¤° में शादी
कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का à¤à¤• मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण लड़की की कम उमà¥à¤° में शादी और à¤à¤• से अधिक बार गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करना है। आंकड़ों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जिले में 22 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ महिलाओं की शादी 18 वरà¥à¤· से कम उमà¥à¤° में हो जाती है। कम उमà¥à¤° में शादी होने से लड़की पर यह दवाब बनाया जाता है कि वह शादी के à¤à¤• साल à¤à¥€à¤¤à¤° ही गरà¥à¤ धारणकर कर ले। चाहे वो गरà¥à¤ के लिठशारीरिक और मानसिक तौर पर तैयार हो या नहीं। राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ फेमिली हेलà¥à¤¥ सरà¥à¤µà¥‡-4 के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जिले में 19 साल से पहले लगà¤à¤— 4.9 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ महिलाà¤à¤‚ जलà¥à¤¦à¥€ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ कर लेती हैं। विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का मानना है कि 19 वरà¥à¤· से कम उमà¥à¤° में गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ अविकसित बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जनà¥à¤® देती है। à¤à¤¸à¥‡ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° बचà¥à¤šà¥‡ या तो समय से पहले जनà¥à¤® लेते हैं या कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ होते हैं।
बार बार पà¥à¤°à¤¸à¤µ
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में पà¥à¤¤à¥à¤° की चाहत में मां को बार बार पà¥à¤°à¤¸à¤µ पीड़ा से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ पड़ता है। कई बार महिलाओं के पास यह निरà¥à¤£à¤¯ लेने का अधिकार नहीं होता कि वह कब गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ हो। यह फैसला या तो उनका पति लेता है या सास। इसमें दो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बीच में अंतर का à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं रखा जाता। जिसकी वजह से जनà¥à¤® लेने वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ-साथ मां à¤à¥€ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का शिकार हो जाती है।
जागरूकता है सबसे बड़ा उपाय
अगर पोषण और कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ के बारे में लोगो में जागरूकता आ जाठऔर परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं और रà¥à¥à¤¿à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤à¤¾ का चकà¥à¤° टूट जाठतो काफी हद तक कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ को रोका जा सकता है। समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ में लड़का, लड़की में होने वाले à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के सोच में बदलाव लाने पर ही कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ को हराया जा सकता।
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